Mahipal Singh
राजस्थान के सीकर ज़िले के एक छोटे से गाँव (भूकरान का बास)से निकलकर आज जिस मुकाम तक पहुँचा हूँ, वह किसी एक दिन का परिणाम नहीं है। यह सफर है—संघर्ष का, सीख का, अनुशासन का और लगातार मेहनत का।
मेरा मानना है कि इंसान की पहचान उसकी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों में लिए गए फैसले बनाते हैं। मेरी कहानी भी इसी सोच का प्रतिबिंब है।
शुरुआत: एक साधारण पृष्ठभूमि
मेरा जन्म 14 अगस्त 1980 को एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ।
मेरे पिता श्री धन्ने सिंह किसान हैं और खेती करके परिवार का पालन-पोषण करते थे।
मेरी माता श्रीमती हरकोरी देवी एक गृहिणी रहीं है , जिन्होंने पूरे परिवार को संस्कार, धैर्य और सादगी के साथ आगे बढ़ाया।
हमारे घर में संसाधन सीमित थे, लेकिन मूल्यों की कोई कमी नहीं थी।
ईमानदारी, मेहनत और आत्मसम्मान—ये तीन चीज़ें बचपन से मेरे जीवन का हिस्सा रहीं।
परिवार में एक भाई और एक बहन के साथ पला-बढ़ा और बहुत जल्दी समझ आ गया कि जीवन आसान नहीं होता, लेकिन मेहनत करने वाले के लिए असंभव भी नहीं होता।
शिक्षा: सीमित साधन, स्पष्ट लक्ष्य
मैंने पाँचवीं कक्षा तक की पढ़ाई अपने गाँव (सावलोड लाड़खानी) में रहकर पूरी की।
दसवीं कक्षा की पढ़ाई के लिए मुझे रोज़ लगभग 10 किलोमीटर दूर SK इंटर कॉलेज(सीकर) जाना पड़ता था।
उस समय न सुविधाएँ थीं, न विकल्प—
लेकिन पढ़ाई के प्रति मेरा समर्पण बना रहा।
यही दौर था जिसने मुझे सिखाया कि जब रास्ते कठिन हों, तब अनुशासन ही आपको आगे ले जाता है।
शादी और जिम्मेदारियों की शुरुआत
25 फरवरी 2001 को मेरा विवाह मंजू रानी से हुआ।
शादी के कुछ समय बाद मेरे जीवन में मेरे पहले पुत्र मोहित सिंह का जन्म हुआ।
अब ज़िंदगी सिर्फ़ मेरे बारे में नहीं रही।
जिम्मेदारियाँ बढ़ चुकी थीं और स्थिर भविष्य की ज़रूरत भी।
इसी वर्ष मैंने भारतीय सेना में भर्ती होकर सिपाही के रूप में अपनी सेवा शुरू की।
देशसेवा मेरे लिए सम्मान की बात थी, लेकिन सेना का जीवन आसान नहीं होता।
सेना का जीवन और आत्मसंघर्ष
सेना की नौकरी के दौरान मैं अपने छोटे परिवार के साथ किराए के मकान में रहता था।
कर्तव्य, सीमित आय, परिवार को समय न दे पाना—
जीवन एक सामान्य लेकिन संघर्षपूर्ण ढर्रे पर चल रहा था।
मैं अपने माता-पिता से दूर, एक अनजान शहर में रह रहा था।
अंदर ही अंदर यह सवाल उठता था—
क्या मैं अपने परिवार और अपने सपनों को इससे बेहतर जीवन दे सकता हूँ?
यहीं से मेरे जीवन में बदलाव की सोच ने जन्म लिया।
टर्निंग पॉइंट: डायरेक्ट सेलिंग से पहचान
मेरठ के पोस्टिंग के दौरान मुझे डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री मे आने का मौका मिला।
यह सिर्फ़ एक बिज़नेस अवसर नहीं था,
बल्कि ऐसा प्लेटफ़ॉर्म था जहाँ मेहनत करने वाले व्यक्ति को उसकी काबिलियत के अनुसार पहचान मिलती है।
मैंने बिना किसी बड़े सपोर्ट के,
साइकिल से घर-घर जाकर लोगों को प्लान समझाना शुरू किया।
शुरुआत आसान नहीं थी—
लोग मना करते थे, भरोसा नहीं करते थे,
लेकिन मैंने हार मानना नहीं सीखा था।
मेहनत का परिणाम
लगातार मेहनत और ईमानदारी का असर दिखने लगा।
2009 मे अपने जीवन की सबसे पहेली कार ली Swift Desire
2011 में मैंने डायरेक्ट सेलिंग का सबसे सम्मानित Diamond Rank हासिल किया ।
यह मेरे लिए सिर्फ़ रैंक नहीं थी,
यह विश्वास था कि सही दिशा में की गई मेहनत ज़िंदगी बदल सकती है।
लगातार ग्रोथ और विस्तार
2010 में मेरे दूसरे पुत्र निकेत सिंह का जन्म हुआ।
परिवार बढ़ा और मेरी ज़िम्मेदारियाँ भी।
July 2012 में मैंने अपनी दूसरी कार Chevrolet Cruze AT ली, और यहीं से 8990 नंबर की शुरुआत हुई
2012 से शुरू होकर आज के समय में 200+ luxury cars 8990 नंबर के साथ मौजूद हैं।
इसी समय मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा करना शुरू किया और
थायलैंड, दुबई, सिंगापुर जैसे कई देशों में घूमने का अनुभव लिया।
जो सफर कभी साइकिल से शुरू हुआ था,
अब वैश्विक स्तर तक पहुँच चुका था।
AWPL: एक नई सोच, एक नया अध्याय
आगे चलकर मेरी मुलाकात श्री संजीव कुमार से हुई,
जो भारतीय सेना में कर्नल पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
उन्होंने Asclepius Wellness Private Limited (AWPL) की स्थापना की—
एक ऐसी कंपनी जो शुद्ध और प्रमाणिक आयुर्वेदिक उत्पादों पर आधारित है।
मैंने 13-Oct-2015 में AWPL जॉइन किया।
यह मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक रहा।
यहाँ मेरा लक्ष्य सिर्फ़ बिज़नेस नहीं था,
बल्कि लोगों को स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आय का अवसर देना था।
उपलब्धियाँ: मेहनत की पहचान
मेरी यात्रा में कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ रहीं—
- 2017 – पहली लग्ज़री कार Jaguar
- 2021 – डायरेक्ट सेलिंग क्षेत्र की दुर्लभ Porsche (Germany)
- 2022 – Fortuner Legender
- 2025 – Defender 130
मेरे लिए ये गाड़ियाँ स्टेटस नहीं,
बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और अनुशासन का प्रतीक हैं।
आज मैं कहाँ हूँ
आज मैं AWPL में Crown Ambassador Rank पर कार्यरत हूँ।
मेरा फोकस सिर्फ़ अपनी ग्रोथ नहीं,
बल्कि उन हजारों लोगों की ग्रोथ है जो मेरे साथ इस सफर में जुड़े हैं।
मैं मानता हूँ—
सफलता अकेले में नहीं,
टीम और विश्वास के साथ मिलकर बनती है।
Mahipal Singh
